Saturday, 15 February 2014

ॐ जय श्री राधे कृष्णा ॐ जय श्री श्याम

प्रेरणादायक कहानी
एक गरीब युवक, अपनी गरीबी से परेशान होकर,
अपना जीवन समाप्त करने नदी पर गया, वहां एक
साधू ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।
साधू ने, युवक की परेशानी को सुन कर कहा, कि मेरे
पास एक विद्या है, जिससे ऐसा जादुई घड़ा बन
जायेगा जो भी इस घड़े से मांगोगे, ये जादुई
घड़ा पूरी कर देगा, पर जिस दिन ये घड़ा फूट गया,
उसी समय, जो कुछ भी इस घड़े ने दिया है, वह
सब गायब हो जायेगा।
अगर तुम मेरी 2 साल तक सेवा करो, तो ये घड़ा,
मैं तुम्हे दे सकता हूँ और, अगर 5 साल तक तुम
मेरी सेवा करो, तो मैं, ये घड़ा बनाने
की विद्या तुम्हे सिखा दूंगा। बोलो तुम क्या चाहते
हो,
युवक ने कहा, महाराज मैं तो 2 साल ही आप
की सेवा करना चाहूँगा , मुझे तो जल्द से जल्द, बस
ये घड़ा ही चाहिए, मैं इसे बहुत संभाल कर रखूँगा,
कभी फूटने ही नहीं दूंगा।
इस तरह 2 साल सेवा करने के बाद, युवक ने
वो जादुई घड़ा प्राप्त कर लिया, और अपने घर
पहुँच गया।
उसने घड़े से अपनी हर इच्छा पूरी करवानी शुरू कर
दी, महल बनवाया, नौकर चाकर मांगे,
सभी को अपनी शान शौकत दिखाने लगा,
सभी को बुला-बुला कर दावतें देने लगा और बहुत
ही विलासिता का जीवन जीने लगा, उसने शराब
भी पीनी शुरू कर दी और एक दिन नशें में, घड़ा सर
पर रख नाचने लगा और ठोकर लगने से घड़ा गिर
गया और फूट गया.
घड़ा फूटते ही सभी कुछ गायब हो गया, अब युवक
सोचने लगा कि काश मैंने जल्दबाजी न की होती और
घड़ा बनाने की विद्या सीख ली होती, तो आज मैं,
फिर से कंगाल न होता।
" ईश्वर हमें हमेशा 2 रास्ते पर रखता है एक
आसान -जल्दी वाला और दूसरा थोडा लम्बे समय
वाला, पर गहरे ज्ञान वाला, ये हमें चुनना होता है
की हम किस रास्ते पर चलें "
" कोई भी काम जल्दी में करना अच्छा नहीं होता,
बल्कि उसके विषय में गहरा ज्ञान
आपको अनुभवी बनाता है "
आपका दिन मंगलमय हो !!
ॐ जय श्री राधे कृष्णा ॐ जय श्री श्याम

Thursday, 2 January 2014

मानस से : नवधा भक्ति

प्रथम भगति संतन्ह कर संगा । दूसरि रति मम कथा प्रसंगा ॥
गुर पद पंकज सेवा तीसरि भगति अमान।
चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान ॥
मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा । पंचम भजन सो बेद प्रकासा ॥
छठ दम सील बिरति बहु करमा । निरत निरंतर सज्जन धरमा ॥
सातवँ सम मोहि मय जग देखा । मोतें संत अधिक करि लेखा ॥
आठवँ जथालाभ संतोषा । सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा ॥
नवम सरल सब सन छलहीना । मम भरोस हियँ हरष न दीना ॥

नव महुँ एकउ जिन्ह के होई । नारि पुरुष सचराचर कोई ॥
मम दरसन फल परम अनूपा । जीव पाव निज सहज सरूपा ॥ 

सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम ।
ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम ॥

Wednesday, 25 December 2013

Chamunda Mandir- Shakti Peeth-चामुंडा मंदिर- शक्तिपीठ


हिन्दू श्रद्धालुओं का मुख्य केंद्र और 51 शक्तिपीठों में एक चामुंडा देवी देव भूमि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है. बानेर नदी के तट पर बसा यह मंदिर महाकाली को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शंकर माता सती को अपने कंधे पर उठाकर घूम रहे थे, तब इसी स्थान पर माता का चरण गिर पड़ा था और माता यहां शक्तिपीठ रूप में स्थापित हो गई. चामुंडा देवी मंदिर भगवान शिव और शक्ति का स्थान है. भक्तों में मान्यता है कि यहां पर शतचंडी का पाठ सुनना और सुनाना श्रेष्ठकर है और इसे सुनने और सुनाने वाले का सारा क्लेश दूर हो जाता है.
दुर्गा सप्तशती के सप्तम अध्याय में वर्णित कथाओं के अनुसार एक बार चण्ड-मुण्ड नामक दो महादैत्य देवी से युद्ध करने आए तो, देवी ने काली का रूप धारण कर उनका वध कर दिया. माता देवी की भृकुटी से उत्पन्न कलिका देवी ने जब चण्ड-मुण्ड के सिर देवी को उपहार स्वरुप भेंट किए तो देवी भगवती ने प्रसन्न होकर उन्हें वर दिया कि तुमने चण्ड -मुण्ड का वध किया है, अतः आज से तुम संसार में चामुंडा के नाम से विख्यात हो जाओगी. मान्यता है कि इसी कारण भक्तगण देवी के इस स्वरुप को चामुंडा रूप में पूजते हैं.
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

Hindu shraddhaluo ka mukhya kendra aur 51 shaktipitho me ek Chamunda Devi dev bhumi Himachal Pradesh ke Kangda zile me sthit hai. Baner Nadi ke tat par basa yah mandir Mahakali ko samarpit hai. Pauranik kathao ke anusar jab Bhagvan Shankar Mata Sati ko apne kandhe par uthakar ghum rahe the, tab isi sthan par mata ka charan gir pada tha aur mata yaha shaktipith roop me sthapit ho gayi. Chamunda Devi Mandir Bhagvan Shiv aur Shakti ka sthan hai. Bhakto me manyata hai ki yaha par Shatchandi ka path karna sunana aur sunaana shreshthkar hai aur ise sunane aur sunane wale ka sara klesh door ho jata hai.
Durga Saptshati ke saptam adhyaay me varnit kathao ke anusar ek bar Chand-Mund namak do mahadaitya Devi se yuddh karne aaye to, Devi ne Kali ka roop dharan kar unka vadh kar diya. Mata Devi ki bhrikuti se utpann Kalika Devi ne jab Chand-Mund ke sir Devi ko uphar swaroop bhent kiye to Devi Bhagvati prasann hokar unhe var diya ki tumne Chand-Mund ka vadh kiya hai, atah aaj se tum sansar me Chamunda ke naam se vikhyat ho jaaogi. Manyata hai ki isi karan bhaktgan Devi ke is swaroop ko Chamunda roop me poojte hain.



शहर :कांगड़ा
राज्य :हिमाचल प्रदेश
क्षेत्र :उत्तर भारत

Tuesday, 17 December 2013

श्री हरसिद्धि देवी 
यहाँ सती की केहुनी गिरी थी इसी से यहाँ देवी की कोई प्रतिमा नहीं , 

प्राचीन काल में चण्ड, प्रचण्ड नामक दो राक्षस थे , जिन्होंने अपने बल - पराक्रम से सारे संसार को कंपा दिया था। एक बार ये दोनों कैलास पर गए . जब ये दोनो
ं अंदर जाने लगे तो द्वार पर नंदीगण ने इन्हे रोका, जिससे क्रोधित होकर इन्होने नंदीगण को घायल कर डाला। जब भगवान् शंकर को यह बात मालुम हुई तो उन्होंने चण्डी का समरण किया . देवी ने तुरंत प्रकट होकर शिवजी की आज्ञा के अनुसार उन राक्षस का वध कर दिया। शिवजी ने देवी की विजय पर प्रसन्न होकर कहा कि अब से संसार में तुम्हारा नाम 'हरसिद्धि' प्रसिद्ध होगा और लोग इसी नाम से तुम्हारी पूजा करेंगे। तब से माता हरसिद्धि उज्जैन के महाकालवन में ही विराजती है 

कहते है सम्राट विक्रमादित्य कि आराध्या देवी यह श्री हरसिद्धि ही थी। वह इन्ही की कृपा से निर्विघ्न शासनकार्य चलाया करते थे। महाराज माताजी के इतने बड़े भक्त थे कि वह हर बारहवे साल सवयं अपने हाथो अपना सिर उनके चरणो पर चढ़ाया करते थे और माता की कृपा से उनका सिर फिर पैदा हो जाता था। इस तरह राजा ने ग्यारह बार पूजा की और बार -२ जीवित हो गए। बारहवी बार जब उन्हों ने पूजा कि तो सिर वापस नहीं हुआ और इस तरह उनका जीवन समाप्त हो गया। आज भी मंदिर के एक कोने में ग्यारह सिन्दूर लगे हुए रुण्ड रखे हुए है। लोगो का कहना है कि ये विक्रम के कटे हुए मुण्ड है। किन्तु इस विषय में कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं पाया जाता। अब कहिये जय माता

Sunday, 17 November 2013

श्रीमद्भागवत महापुराण * : Jai Shree Krishna

( श्रीमद्भागवत महापुराण - १०/३/४ ) - - [ श्री कृष्ण जन्म ] ( कृपया पूरा पढ़ें ) - -संत पुरुष पहले से ही चाहते थे कि असुरों की बढ़ोतरी न होनें पाये l अब उनका मन सहसा प्रसन्नता से भर गया l जिस समय भगवान् के आविर्भाव का अवसर आया , स्वर्ग में देवताओं की दुन्दुभियाँ अपनें आप बज उठीं l 


                   
                                                                                                                श्रीमद्भागवत महापुराण *

Thursday, 14 November 2013

Monday, 11 November 2013

श्रीमद्भागवत महापुराण - १०/०३/०३ : Jai Shree Krishna

( श्रीमद्भागवत महापुराण - १०/०३/०३ ) - [ श्री कृष्ण जन्म ]- नदियों का जल निर्मल हो गया था l रात्रि के समय भी सरोवरों में कमल खिल रहे थे l वन में वृक्षों की पंक्तियाँ रंग बिरंगे पुष्पों के गुच्छों से लड़ गयी थीं l कहीं पक्षी चहक रहे थे , तो कहीं भौंरे गुनगुना रहे थे l                                                                                                                                                                                  ..श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत गीता - १०/०३/ १-२ ) : Jai Shree Krishna

( श्रीमद्भागवत गीता - १०/०३/ १-२ ) - { कृष्ण जन्म } - [ कृपया पूरा पढ़ें ] - - श्री शुकदेव जी कहते हैं --> परीक्षित ! अब समस्त शुभ गुणों से युक्त बहुत सुहावना समय आया l रोहिणी नक्षत्र था l आकाश के सभी नक्षत्र ,ग्रह और तारे शांत -- सौम्य हो रहे थे l दिशाएँ स्वच्छ प्रसन्न थीं l निर्मल आकाश में तारे जगमगा रहे थे l पृथ्वी के बड़े - बड़े नगर , छोटे - छोटे गाँव , अहीरों की बस्तियाँ और हीरे आदि की खानें मंगलमय हो रही थीं l
                                                                                            .गीता .

जो भी काम करना शुरू करे उसे पूरा करके ही छोड़े जय माता दी

एक मकड़ी थी. उसने आराम से रहने के लिए एक शानदार
जाला बनाने का विचार किया और सोचा की इस जाले मे खूब
कीड़ें, मक्खियाँ फसेंगी और मै उसे आहार बनाउंगी और मजे से
रहूंगी . उसने कमरे के एक कोने को पसंद किया और
वहाँ जाला बुनना शुरू किया. कुछ देर बाद आधा जाला बुन कर
तैयार हो गया. यह देखकर वह मकड़ी काफी खुश हुई
कि तभी अचानक उसकी नजर एक बिल्ली पर पड़ी जो उसे
देखकर हँस रही थी.
मकड़ी को गुस्सा आ गया और वह बिल्ली से बोली , ” हँस
क्यो रही हो?”
”हँसू नही तो क्या करू.” , बिल्ली ने जवाब दिया , ”
यहाँ मक्खियाँ नही है ये जगह तो बिलकुल साफ सुथरी है,
यहाँ कौन आयेगा तेरे जाले मे.”
ये बात मकड़ी के गले उतर गई. उसने अच्छी सलाह के लिये
बिल्ली को धन्यवाद दिया और जाला अधूरा छोड़कर
दूसरी जगह तलाश करने लगी. उसने ईधर ऊधर देखा. उसे एक
खिड़की नजर आयी और फिर उसमे जाला बुनना शुरू किया कुछ
देर तक वह जाला बुनती रही , तभी एक चिड़िया आयी और
मकड़ी का मजाक उड़ाते हुए बोली , ” अरे मकड़ी , तू
भी कितनी बेवकूफ है.”
“क्यो ?”, मकड़ी ने पूछा.
चिड़िया उसे समझाने लगी , ” अरे यहां तो खिड़की से तेज
हवा आती है. यहा तो तू अपने जाले के साथ ही उड़ जायेगी.”
मकड़ी को चिड़िया की बात ठीक लगीँ और वह
वहाँ भी जाला अधूरा बना छोड़कर सोचने लगी अब
कहाँ जाला बनायाँ जाये. समय काफी बीत चूका था और अब
उसे भूख भी लगने लगी थी .अब उसे एक
आलमारी का खुला दरवाजा दिखा और उसने उसी मे
अपना जाला बुनना शुरू किया. कुछ जाला बुना ही था तभी उसे
एक काक्रोच नजर आया जो जाले को अचरज भरे नजरो से देख
रहा था.
मकड़ी ने पूछा – ‘इस तरह क्यो देख रहे हो?’
काक्रोच बोला-,” अरे यहाँ कहाँ जाला बुनने चली आयी ये
तो बेकार की आलमारी है. अभी ये यहाँ पड़ी है कुछ दिनों बाद
इसे बेच दिया जायेगा और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार
चली जायेगी. यह सुन कर मकड़ी ने वहां से हट जाना ही बेहतर
समझा .
बार-बार प्रयास करने से वह काफी थक चुकी थी और उसके
अंदर जाला बुनने की ताकत ही नही बची थी. भूख की वजह से
वह परेशान थी. उसे पछतावा हो रहा था कि अगर पहले
ही जाला बुन लेती तो अच्छा रहता. पर अब वह कुछ नहीं कर
सकती थी उसी हालत मे पड़ी रही.
जब मकड़ी को लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता है तो उसने
पास से गुजर रही चींटी से मदद करने का आग्रह किया .
चींटी बोली, ” मैं बहुत देर से तुम्हे देख रही थी , तुम बार- बार
अपना काम शुरू करती और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़
देती . और जो लोग ऐसा करते हैं , उनकी यही हालत होती है.”
और ऐसा कहते हुए वह अपने रास्ते चली गई और
मकड़ी पछताती हुई निढाल पड़ी रही.
दोस्तों , हमारी ज़िन्दगी मे भी कई बार कुछ ऐसा ही होता है.
हम कोई काम start करते है. शुरू -शुरू मे तो हम उस काम के
लिये बड़े उत्साहित रहते है पर लोगो के comments की वजह
से उत्साह कम होने लगता है और हम अपना काम बीच मे
ही छोड़ देते है और जब बाद मे पता चलता है कि हम अपने
सफलता के कितने नजदीक थे तो बाद मे पछतावे के
अलावा कुछ नही बचता

Saturday, 2 November 2013

HAPPY CHOTI DIWALI : काली पूजन की हार्दिक शुभकामनाये !

The day before diwali is celebrated as kali chaudas, narak chaturdashi, roop chaudas and chhoti diwali.
Kali means Dark (eternal) and Chaudas - Fourteenth. Thus, celebrated on the 14th day of the dark half of Āshwin month, Kali Chaudas is the day allotted to the worship of Mahakali or Shakti and is believed that on this day Kali killed the most wicked Narakasura. Also referred to as Naraka-Chaturdashi, Kali Chaudas is day to abolish laziness and evil which create hell in our life and shine light on life. The strength to protect others is referred as Kali, and if its used for God's work is called Maha-kali.

There are many significant rituals and stories behind this day. lets read a few of them. 

Story of Lord Hanuman and Sun

Once Hanumanji as a baby was very hungry. Whilst lying down he saw the sun in the sky and thought it was a fruit and went to pick it. He flew into the sky and put the whole sun in his mouth causing darkness throughout the entire universe. Lord Indra requested that Hanumanji return the sun. When Hanumanji refused, Lord Indra unleashed his vajra and knocked Hanumanji down to earth releasing the Sun. 

Legend of King Bali

King Bali became the most powerful king on earth. But he became highly arrogant. His form of charity was an occasion for pomp and show and those who went to seek Alms from the king Bali suffered insults and humiliation. His arrogance and misrule ended when the Lord appeared as beggar (vaman avtaar). King Bali asked the dwarf beggar to get anything in his kingdom. Lord replied he just want a piece of land that could be covered in his 3 steps. And with his first step Lord Vishnu covered the entire heaven, with the second step the earth and asked Bali where to keep his third step. Bali offered his head and became spiritually enlightened. The Narak chaturdashi day therefore is dedicated to lights and prayers and the elimination of greed.

Story of Narakasur vadh

Demon king Narakasur defeated Lord Indra and snatched away the magnificent earrings of Aditi, the Mother of Goddess. He also imprisoned sixteen thousand daughters of the gods and saints in his harem. On the day previous to Narak chaturdashi, Lord Krishna and devi Satyabhama killed the demon and liberated the imprisoned women. They also recovered those precious earrings of  Maa Aditi. Destruction of Narkasur made everyone happy and that why this day is celebrated as Narak Chaturdashi.

There is a very interesting tale associated with this day.
Narakaasura was a demon king ruling over Praagjyotishapura (the present day Assam). By virtue of his powers and boons secured from God, he became all conquering. Power made him big headed and he became a menace to the good and the holy men. He considered women as only an instrument of fulfilling his desires and had 16,000 ladies in captivity. The Gods headed by Davendra implored Sri Krishna to come to their rescue. Sri Krishna came from Dwarka and destroyed the huge army, which opposed him and finally beheaded Narakaasura himself. The population was freed from the oppressive tyranny and all heaved a sigh of relief. The 16,000 women kept in captivity by the demon king were freed. With a view to removing any stigma on them and according them social dignity, Sri Krishna gave all of them the status of his wives. The people lighted Deepaks on this dark night and made it a bright, cheerful and joyous night by wearing bright and new clothes.

HAPPY CHOTI DIWALI

Bhent--माँ के भेंटे

MAA NE KHEL RACHAYA HAI HUNN MAUJA HI MAUJA... DAR TE APP BULYA HAI HUN MAUJA HI MAUJA ...ASSAN NE US TOH JO MANGYA HAI OH PAYA HAI HUN MAUJA HI MAUJA ... 100-100 WARII CHARNA CH MATHHA ASI TEKYA JADO HOGIYA NE DUR UDASIYAN.. DUNIYA DI SHAAN MAHA RANI DA DIDAR KAR KUSH HUIYAN AKHIAN PAYSIYN ... CHARNA CH VAGDI GANGA DA AMRIT PAAN KARYA HAI HUN MAUJA HI MAUJA .. JAI MATA DI

Friday, 1 November 2013

धनतेरस की पौराणिक कथI

धनतेरस की पौराणिक कथI

एक बार यमराज ने अपने दूतों से प्रश्न किया- क्या प्राणियों के प्राण हरते समय तुम्हें किसी पर दया भी आती है? यमदूत संकोच में पड़कर बोले- नहीं महाराज! हम तो आपकी आज्ञा का पालन करते हैं। हमें दया-भाव से क्या प्रयोजन?

यमराज ने सोचा कि शायद ये संकोचवश ऐसा कह रहे हैं। अतः उन्हें निर्भय करते हुए वे बोले- संकोच मत करो। यदि कभी कहीं तुम्हारा मन पसीजा हो तो निडर होकर कहो। तब यमदूतों ने डरते-डरते बताया- सचमुच! एक ऐसी ही घटना घटी थी महाराज, जब हमारा हृदय काँप उठा था।

ऐसी क्या घटना घटी थी? -उत्सुकतावश यमराज ने पूछा। दूतों ने कहा- महाराज! हंस नाम का राजा एक दिन शिकार के लिए गया। वह जंगल में अपने साथियों से बिछड़कर भटक गया और दूसरे राज्य की सीमा में चला गया। फिर? वहाँ के राजा हेमा ने राजा हंस का बड़ा सत्कार किया।

उसी दिन राजा हेमा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया था। ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके बताया कि यह बालक विवाह के चार दिन बाद मर जाएगा। राजा के आदेश से उस बालक को यमुना के तट पर एक गुहा में ब्रह्मचारी के रूप में रखा गया। उस तक स्त्रियों की छाया भी न पहुँचने दी गई।

किन्तु विधि का विधान तो अडिग होता है। समय बीतता रहा। संयोग से एक दिन राजा हंस की युवा बेटी यमुना के तट पर निकल गई और उसने उस ब्रह्मचारी बालक से गंधर्व विवाह कर लिया। चौथा दिन आया और राजकुँवर मृत्यु को प्राप्त हुआ। उस नवपरिणीता का करुण विलाप सुनकर हमारा हृदय काँप गया। ऐसी सुंदर जोड़ी हमने कभी नहीं देखी थी। वे कामदेव तथा रति से भी कम नहीं थे। उस युवक को कालग्रस्त करते समय हमारे भी अश्रु नहीं थम पाए थे।

यमराज ने द्रवित होकर कहा- क्या किया जाए? विधि के विधान की मर्यादा हेतु हमें ऐसा अप्रिय कार्य करना पड़ा। महाराज! -एकाएक एक दूत ने पूछा- क्या अकालमृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है? यमराज नेअकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा- धनतेरस के पूजन एवं दीपदान को विधिपूर्वक करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है। जिस घर में यह पूजन होता है, वहाँ अकाल मृत्यु का भय पास भी नहीं फटकता।

इसी घटना से धनतेरस के दिन धन्वंतरि पूजन सहित दीपदान की प्रथा का प्रचलन शुरू हुआ।

Monday, 28 October 2013

Jai Shree Krishna








A beautiful life does not just happen,
It is built daily by
Prayer
Humility
Sacrifice and
Hard work.
Bad things are always going to happen in life.
People will hurt you
But you can’t use that an excuse to
hurt someone back.
As long as you know that GOD is for you,
it doesn’t matter who is against you.
Anyone can give up.
It’s the easiest thing in the world to do.
But to hold it together when everyone else
would understand if you fell apart,
That’s true strength.
You change for two reason,
Either you learn enough that you want to
Or
You’ve been hurt enough that you have to.
As much as you want to plan your life,
It has a way of surprising you
with unexpected
Things that will make you Happier than you
originally planned.
That’s what you call …..
GOD's WILL.....

JAY SHRI KRISHNA

GOOD NIGHT WORLD

Saturday, 26 October 2013

माँ की ममता का अद्भुत उदाहरण

माँ की ममता का अद्भुत उदाहरण जो आपकी आँखें नम कर देगा । Incredible hindi story about Mothers sacrifice and love.
"बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि पता नहीं क्यों मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया."
कुछ समय पहले जापान में आये सुनामी के दौरान एक दिल को छू लेने वाली घटना हुई...
भूकंप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए घर की जांच कर रहा था. बारीक दरारों में से महिला का मृत शरीर दिखा, लेकिन वो एक अजीब अवस्था में था. महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी. ठीक वैसे ही जैसे मंदिर में लोग भगवान के सामने नमन करते है. उसके दोनों हाथ किसी चीज़ को पकडे हुए थे और भूकंप से उस महिला की पीठ और सर को काफी क्षति पहुंची थी.
काफी मेहनत के बाद दल के सदस्य ने बारीक दरारों में कुछ जगह बनाकर अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. बचाव दल को उम्मीद थी कि शायद महिला जिंदा हो, लेकिन महिला का शरीर ठंडा हो चूका था और बचाव दल समझ गया की महिला मर चुकी है.
बचाव दल उस घर को छोड़ दूसरे मकानों की ओर चल पड़ा. बचाव दल के प्रमुख का कहना था कि, 'पता नहीं क्यूँ मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ खींच रहा था. कुछ था जो मुझसे कह रहा था कि मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया.'
उसके बाद बचाव दल एक बार फिर उस महिला के घर की तरफ पहुंचा. दल प्रमुख ने मलबे को सावधानी से हटा कर बारीक दरारों में से अपना हाथ महिला की तरफ बढ़ाया. महिला के शरीर के नीचे की जगह को हाथों से टटोलने लगा. तभी उनके मुंह से निकला, 'बच्चा... यहाँ एक बच्चा है.'
अब पूरा दल काम में जुट गया. सावधानी से मलबा हटाया जाने लगा. तब उन्हें महिला के मृत शरीर के नीचे एक टोकरी में रेशमी कम्बल में लिपटा हुआ 3 माह का एक बच्चा मिला. दल को समझ में आ चुका था कि महिला ने अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने जीवन का त्याग किया है.
भूकंप के दौरान जब घर गिरने वाला था तब उस महिला ने अपने शरीर से सुरक्षा देकर अपने बच्चे की रक्षा की थी. डॉक्टर भी जल्द ही वहां आ पहुंचे. दल ने जब बच्चे को उठाया तब बच्चा बेहोश था.
बचाव दल ने बच्चे का कम्बल हटाया तब उन्हें वहां एक मोबाइल मिला, जिसके स्क्रीन पर सन्देश लिखा था, 'मेरे बच्चे अगर तुम बच गए तो बस इतना याद रखना कि तुम्हारी माँ तुमसे बहुत प्यार करती थी.'
मोबाइल बचाव दल में एक हाथ से दूसरे हाथ जाने लगा, सभी ने वो सन्देश पढ़ा, सबकी आँखें नम हो गयी...
अगर इस कहानी ने आपके दिल को भी छुआ हो तो इसे दूसरों के साथ भी बांटें। इसे शेयर करने के लिए आप नीचे दिए गए सोशल मीडिया बटन्स को क्लिक कर सकते हैं। इस कहानी के बारे में भी अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें !!

Thursday, 24 October 2013

एक गरीब युवक, अपनी गरीबी से परेशान होकर, अपना जीवन समाप्त करने नदी पर गया, वहां एक साधू ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।


एक गरीब युवक, अपनी गरीबी से परेशान होकर, अपना जीवन समाप्त करने नदी पर गया, वहां एक साधू ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।

साधू ने, युवक की परेशानी को सुन कर कहा, कि मेरे पास एक विद्या है, जिससे ऐसा जादुई घड़ा बन जायेगा जो भी इस घड़े से मांगोगे, ये जादुई घड़ा पूरी कर देगा, पर जिस दिन ये घड़ा फूट गया, उसी समय, जो कुछ भी इस घड़े ने दिया है, वह सब गायब हो जायेगा।

अगर तुम मेरी 2 साल तक सेवा करो, तो ये घड़ा, मैं तुम्हे दे सकता हूँ और, अगर 5 साल तक तुम मेरी सेवा करो, तो मैं, ये घड़ा बनाने की विद्या तुम्हे सिखा दूंगा। बोलो तुम क्या चाहते हो,
युवक ने कहा, महाराज मैं तो 2 साल ही आप की सेवा करना चाहूँगा , मुझे तो जल्द से जल्द, बस ये घड़ा ही चाहिए, मैं इसे बहुत संभाल कर रखूँगा, कभी फूटने ही नहीं दूंगा।

इस तरह 2 साल सेवा करने के बाद, युवक ने वो जादुई घड़ा प्राप्त कर लिया, और अपने घर पहुँच गया।

उसने घड़े से अपनी हर इच्छा पूरी करवानी शुरू कर दी, महल बनवाया, नौकर चाकर मांगे, सभी को अपनी शान शौकत दिखाने लगा, सभी को बुला-बुला कर दावतें देने लगा और बहुत ही विलासिता का जीवन जीने लगा, उसने शराब भी पीनी शुरू कर दी और एक दिन नशें में, घड़ा सर पर रख नाचने लगा और ठोकर लगने से घड़ा गिर गया और फूट गया.

घड़ा फूटते ही सभी कुछ गायब हो गया, अब युवक सोचने लगा कि काश मैंने जल्दबाजी न की होती और घड़ा बनाने की विद्या सीख ली होती, तो आज मैं, फिर से कंगाल न होता।

" ईश्वर हमें हमेशा 2 रास्ते पर रखता है एक आसान -जल्दी वाला और दूसरा थोडा लम्बे समय वाला, पर गहरे ज्ञान वाला, ये हमें चुनना होता है की हम किस रास्ते पर चलें "

" कोई भी काम जल्दी में करना अच्छा नहीं होता, बल्कि उसके विषय में गहरा ज्ञान आपको अनुभवी बनाता है "
—

Wednesday, 23 October 2013

Jai Mata Di G

मैया जी के चरणों मे ठिकाना चाहिए |
बेटा जो बुलाए माँ को आना चाहिए ||

JAY SHRI KRISHNA

Life goes on.....
Whether you choose to move on and
take a chance in the unknown.
Or stay behind, locked in the past,
thinking of what could’ve been.
Stop worrying about
what you have to
loose and start,
Focusing on what you
have to gain.
Never give up.
There is no such thing as an ending.
Just a new beginning.
Life is 10% of what
happens to you and
90% of how you
respond to it.

The 3 C’s of life:
CHOICE
CHANCES
CHANGES
You must make a
Choice to take a Chance
or your life will never
Change.
Live each day as if it’s your last

 ENJOY YOUR LIFE

JAY SHRI KRISHNA

Tuesday, 22 October 2013

करवा चौथ :


करवा चौथ : चन्द्रोदय...रात ,8, बज कर ,58, मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा
कार्तिक मास कि चतुर्थी के दिन विवाहित महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत किया जाता है। करवा का अर्थात मिट्टी के जल-पात्र कि पूजा कर चंद्रमा को अर्ध्य देने का महत्व हैं। इसीलिए यह व्रत करवा चौथ नाम से जाना जाता हैं। इस दिन पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिये मंगलकामना और स्वयं के अखंड सौभाग्य रहने कि कामना करती हैं।
“जो चंद्रमा में पुरुषरूपी ब्रह्मा कि उपासना करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं, उसे जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता। उसे लंबी और पूर्ण आयु कि प्राप्ति होती हैं।,,
करवा चौथ : पूजन सामग्री की सूची
करवा चौथ एक नारी पर्व है। इस व्रत को सौभाग्यवती महिलाएं करती हैं। इस व्रत में प्रमुखतः गौरी व गणेश का पूजन किया जाता है। जिसमें पूजन सामग्री का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
1. चंदन 2. शहद 3. अगरबत्ती 4. पुष्प 5. कच्चा दूध 6. शक्कर 7. शुद्ध घी
8. दही 9. मिठाई 10. गंगाजल 11. कुंकू 12. अक्षत (चावल) 13. सिंदूर
14. मेहंदी 15. महावर 16. कंघा 17. बिंदी 18. चुनरी 19. चूड़ी 20. बिछुआ
21. मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन 22. दीपक 23. रुई 24. कपूर 25. गेहूं
26. शक्कर का बूरा 27. हल्दी 28. पानी का लोटा
29. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
30. लकड़ी का आसन 31. चलनी 32. आठ पूरियों की अठावरी 33. हलुआ
34. दक्षिणा (दान) के लिए पैसे, इ‍त्यादि।
करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा
बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।
शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।
सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो।
इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।
वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।
उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सुईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।
एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सुई ले लो, पिय सुई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।
इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है।सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।
अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्री गणेश-श्री गणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है।
हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले..